खेती-किसानी पर भाजपाई चोट - हरियाणा सरकार खत्म कर रही किसान आयोग
चंडीगढ़, 22 अगस्त। खेती के शत्रु बनी मोदी और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारें खेती से जुड़ी योजनाओं और कानूनों पर डाका डाल रही हैं। हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार किसानों से जुड़े राज्य किसान आयोग को खत्म करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के अधीन बनी किसान अथॉरिटी में ही किसान आयोग को मर्ज करने की प्लानिंग है। विभाग की ओर से इस बारे में फाइल तैयार की गई। इस प्रस्ताव पर सीएम मनोहर लाल खट्टर की भी सहमति मिल चुकी है। अब यह केस कानूनी राय के लिए एलआर के पास भेजा गया है।
कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एलआर से मंजूरी मिलने के बाद सरकार मर्जर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। किसान आयोग को किसान अथॉरिटी में मर्ज किया जाना है, इसलिए अथॉरिटी के एक्ट में संशोधन होगा। एलआर को कहा गया है कि वे अथॉरिटी में संशोधन का ड्रॉफ्ट तैयार करें ताकि इस पर अमल किया जा सके। सरकार की कोशिश तो इसी मानसून सत्र में आयोग को अथॉरिटी में मर्ज करने का बिल लाने की थी लेकिन इसमें कुछ देरी होती नजर आ रही है। मानसून सत्र में अगर यह प्रस्ताव नहीं आता तो इसे अगले बजट सत्र में पेश किया जाएगा। मोटे तौर पर सरकार यह मन बना चुकी है कि अब राज्य में किसान आयोग को नहीं रखा जाएगा। इस फैसले के पीछे दलील दी गई है कि किसान आयोग और अथॉरिटी की वर्किंग में कोई अंतर नहीं है। दोनों का ही काम, किसानों के कल्याण के लिए नई योजनाएं बनाना, खेती की नई तकनीक को बढ़ावा देना और परंपरागत की बजाय खेती में नये प्रयोग के लिए किसानों को प्रेरित करना है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के समय में किसान आयोग का गठन हुआ था। खट्टर सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में आयोग को बनाए रखा और इसमें चेयरमैन व सदस्यों की भी नियुक्ति की। इनका कार्यकाल पूरा होने के बाद अब फिर से आयोग का पुनर्गठन होना था, लेकिन आयोग में चेयरमैन व सदस्य नियुक्त नहीं किए हैं। सूत्रों का कहना है कि मार्च में हुई कृषि विभाग की बैठक के दौरान ही सीएम ने आयोग का अथॉरिटी में मर्ज करने का सैद्धांतिक फैसला ले लिया था।
बताया जाता है कि किसान आयोग को अथॉरिटी में मर्ज करने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अथॉरिटी स्टेट एक्ट से बनी है। वहीं आयोग का गठन महज सरकार के निर्देशों पर हुआ है। अथॉरिटी कानूनन काफी मजबूत है, जबकि आयोग को कानूनी अधिकार नहीं हैं। ऐसे में अब अथॉरिटी के एक्ट में बदलाव होगा। संशोधन से आयोग का अथॉरिटी में मर्ज करने का बिल ड्रॉफ्ट बनेगा। फिलहाल सरकार एलआर को भेजी गई फाइल का इंतजार कर रही है।
हरियाणा किसान आयोग अभी तक 19 कार्यदलों का गठन कर चुका है। इनमें कृषि नीति का मसौदा, पशुपालन विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मत्स्य पालन विकास, बागवानी विकास, संरक्षित खेती, कृषि संरक्षण, बारानी क्षेत्र का विकास, फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को बाजार से जोड़ने, कटाई के बाद प्रौद्योगिकी एवं मूल्य संवर्द्धन, मधुमक्खी पालन, कृषि विस्तार, परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण, दुधारू गो पशुओं और भैंसों से संबंधित पशु पोषण, मशरूम की खेती को बढ़ावा देने, कृषि व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के अलावा पराली प्रबंधन पर कार्यदल का गठन किया गया है।
खेती के विकास के लिए बने इस किसान आयोग की ओर से 6 और नये कार्यदल बनाने की योजना बनाई गई थी। ये दल अभी प्रस्तावित हैं, इन पर फैसला नहीं हो सका है। इनमें फसल विविधीकरण के लिए जीआईएस तथा भूमि उपयोग नियोजन, निवेश उपयोग तथा आपूर्ति (बीज, जैव-उर्वरक, उर्वरक, जैव-कीटनाशक, कीटनाशक), कृषि में महिलाओं तथा युवाओं का सशक्तिकरण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के अलावा किसानों की सुविधा के लिए कृषि ऋण, सहकारिता एवं फसल बीमा पर कार्यदल का गठन करने की सिफारिश आयोग द्वारा की हुई है।

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