Punjab कैप्टन, मोदी सरकार के जनविरोधी ‘कोरोना नाटक’ के खिलाफ पंजाब के जनसंगठनों छेड़ा अभियान, जानिये इनका क्या कहना है और क्या हैं इनकी मांगें ?

LUDHIANA (PUNJAB, INDIA). केंद्र की मोदी सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए पंजाब की कैप्टन सरकार ने राज्य की जनता पर कोरोना के बहाने दमनकारी, नाजायज पाबंदियाँ थोपी हैं। कई जगहों पर जनता ने कोरोना ड्रामे की हकीकत को समझते हुए सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है। हम इसका स्वागत करते हैं और सभी लोगों को सरकार के दमनकारी कदमों के खिलाफ जोरदार संघर्ष छेड़ने का आह्नान करते हैं। विश्व-भर में वैज्ञानिकों, महामारी विशेषज्ञों, डॉक्टरों की अच्छी-खासी संख्या का यह मानना है कि कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी कोई महामारी नहीं है, बल्कि एक आम मौसमी फ्लू है। जिस तरह अन्य आम मौसमी बीमारियों से बुजुर्गों और अन्य गंभीर बीमार व्यक्तियों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है और पुख्ता इलाज न मिलने के कारण लंबी कमजोरी और यहाँ तक कि मौत का भी शिकार होना पड़ता है, उसी तरह कोरोना बीमारी में भी होता है। कोरोना वायरस से लोगों के सिर्फ 10-15 प्रतिशत हिस्से को ही बीमारी के लक्षण आते हैं और इलाज की जरूरत रहती है। उसमें से भी एक और छोटे हिस्से करीब 5 प्रतिशत के लिए अधिक दवा-इलाज की जरूरत रहती है। इन थोड़े-से मामलों में भी मुख्य कारण उम्र या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण रोग प्रतिरोध क्षमता का कमजोर होना है। एम्स के डायरेक्टर डॉ- रणदीप गुलेरिया समेत बहुत सारे अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी यही मानना है और एक साल से अधिक समय की जमीनी हकीकघ्तें भी इसी बात से मेल खाती हैं। बहुत सारे विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना वायरस के चलते मृत्यु दर 0.01 प्रतिशत है। इसलिए कोरोना से लोगों के नुकसान के बचाव के लिए लॉकडाउन, कर्फ्यू और अन्य पाबंदियों की जरा भी जरूरत नहीं। बल्कि पिछले वर्ष का अनुभव बताता है कि इन पाबंदियों से होने वाला आर्थिक, मानसिक, सामाजिक नुकघ्सान कहीं अधिक है, बल्कि यह पाबंदियाँ बड़े स्तर पर मौतों का कारण बनी हैं। कोरोना बीमारी के मामले में भी सरकार द्वारा वे सभी कघ्दम उठाए जाने जरूरी हैं, जो अन्य बीमारियों के मामले में जरूरी हैं। जनता को पुख्ता स्वास्थ्य सहूलतें, दवा-इलाज तभी हासिल हो सकते हैं, अगर इनका प्रबंध सरकारी तौर पर किया जाए। लेकिन सभी को सरकारी पुख्ता दवा-इलाज देने की जगह सरकार ने लॉकडाउन, कर्फ्यू के जरिए जनता को सरकारी और निजी अस्पतालों/डिस्पेंसरियों/क्लीनिकों से मिल रहे थोड़े-बहुत दवा-इलाज का भी बेड़ा गर्क कर दिया है। इन कदमों के जरिए पैदा हुई बदहाली और इस तथाकथित महामारी का हौवा खड़ा होने के चलते लोगों की रोगों से लड़ने की शारीरिक क्षमता और भी कम होती चली जा रही है। इस तरह सरकार के इन दमनकारी कघ्दमों से कोरोना और अन्य बीमारियों से लोगों का कई गुणा अधिक नुकघ्सान हो रहा है। कोरोना के शोर-शराबे के एक साल से अधिक समय ने कोरोना के बारे में उपरोक्त समझ की पुष्टि की है। यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है और भारत के हुक्मरान भी यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि लॉकडाउन, कर्फ्यू और अन्य तरह-तरह की पाबंदियाँ लगाकर कोरोना का बाल भी बाँका नहीं होता। लेकिन फिर भी वे ये सारी पाबंदियाँ क्यों थोप रहे हैं? असल में कोरोना को जनता के अधिकारों को कुचलने, जनआवाज का गला घोटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले साल केंद्र की मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून, नागरिक रजिस्टर और जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ देशव्यापी जनांदोलन से बुरी तरह घबराई हुई थी। कोरोना के बहाने थोपे गए लॉकडाउन, कर्फ्यू के जरिए यह संघर्ष कुचल दिया गया। जनता की आवाज दबाकर श्रम कानूनों में संशोधन कर दिए गए, नए कृषि कानून बना दिए गए। सरकारी संस्थानों का, जनता को हासिल सरकारी सहूलतों का निजीकरण तेज कर दिया गया। कैप्टन सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए, उससे भी दो कदम आगे बढ़कर कोरोना के बहाने पंजाब की जनता पर दमन-अत्याचार का कहर बरपा किया, क्योंकि इन सभी नीतियों से कांग्रेस और भाजपा का कोई मतभेद नहीं है। नए कृषि कानून बनाकर मोदी सरकार बुरी तरह फँस गई। इसने इन काले कानूनों के खिलाफ इतने बड़े जन-आंदोलन के उभार के बारे में सोचा तक नहीं था। कांग्रेस और कैप्टन सरकार भले ही नए कृषि कानूनों के विरोध की बात करती है, लेकिन यह शुद्ध ढौंग है। कांग्रेस देशी-विदेशी कारपोरेटों के जरा भी खिलाफ नहीं, बल्कि इनकी सबसे पुरानी सेवादार है। मोदी की तरह कांग्रेस भी कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को कुचलना चाहती है। इस बार कोरोना की तथाकथित महामारी की दूसरी लहर के उभार की बात करते हुए फैलाए जा रहे डर, थोपी जा रही पाबंदियों का मुख्य निशाना कृषि कानूनों के खिलाफ खासकर पंजाब समेत उत्तरी भारत में जारी जनांदोलन है। कोरोना ड्रामे का फायदा वैक्सीन कंपनियों को तो होना ही है। इसलिए अब फिर से कोरोना का डर फैलाना तेज कर दिया गया है। गोदी मीडिया के प्रचार तंत्र के जरिए कोरोना का हौवा खड़ा किया जा रहा है। आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर बताए जा रहे हैं। गैर-कोरोना मौतों को कोरोना के खाते में डाला जा रहा है। कोरोना का खौफ फैलाने के लिए तरह-तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, हफड़ा-तफड़ी का माहौल पैदा किया जा रहा है। हुक्मरानों की देशी-विदेशी पूँजीपतियों के हित में राजनीतिक-आर्थिक हिसाब-किताब के तहत थोपे जा रहे लॉकडाउन, कर्फ्यू और अन्य जनविरोधी पाबंदियों के चलते मजदूरों, दुकानदारों, रेहड़ी-फड़ी और अन्य काम-धंधा करने वाले मेहनतकशों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। भुखमरी के डर से मजदूरों को पिछले साल की तरह फिर से गाँवों को जाना पड़ रहा है। लोगों का रोजगार छीनकर, काम-धंधे ठप्प करके फिर से आर्थिक बदहाली के और गहरे गड्ढे में धकेला जा रहा है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटियाँ-कोचिंग सेंटर और अन्य शिक्षण संस्थाएँ बंद करके छात्रों की पढ़ाई-लिखाई, उनके भविष्य से खेला जा रहा है। इसलिए हम सभी लोगों का आह्नान करते हैं कि आओ, मिलकर देश और पंजाब के हुक्मरानों द्वारा कोरोना की दहशत फैलाने और दमनकारी पाबंदियों का जोरदार विरोध करते हुए इन माँगों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें - -कोरोना का हौवा खड़ा करना बंद किया जाए। इस बहाने जनता पर थोपे जा रहे लॉकडाउन, कर्फ्यू, जबरन टेस्ट, जबरन टीकाकरण, चालान आदि दमनकारी कदम वापिस लिए जाएँ। टेस्ट और टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक हों। सरकारें कोरोना की तथाकथित महामारी की दहशत फैलानी बंद करके कोरोना समेत सभी बीमारियों के दवा-इलाज के लिए पुख्ता कदम उठाएँ। ओ.पी.डी. सेवा तुरंत बहाल हो। सभी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए जरूरी ऑक्सीजन और अन्य दवा-इलाज का पूरा प्रबंध किया जाए। -सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों, लेबोरेटरियों, दवा-उत्पादन आदि का पूरा ढाँचा मजबूत किया जाए, इसका विस्तार किया जाए। स्वास्थ्य सहूलतों से संबंधित सभी निजी संस्थानों का सरकारीकरण किया जाए। -लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों के कारण मजदूरों, दुकानदारों, रेहड़ी-फड़ी व अन्य काम-धंधे वाले लोगों के हुए नुकघ्सान की भरपाई की जाए, तुरंत पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। कोरोना के बहाने मजदूरों-मुलाजिमों की छँटनी, तनख्वाहों में कटौती बंद की जाए। पाबंदियों के कारण बेरोजगार हुए लोगों को तुरंत राशन, सब्जियाँ, दूध आदि पहुँचाने का प्रबंध किया जाए। -सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटियाँ तुरंत खोले जाएँ। जारीकर्ता संगठन- नौजवान भारत सभा, कारखाना मजदूर यूनियन, पंजाब, टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब, पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन (ललकार) आप सबको सादर अभिवादन ! Regards to all of you ! कृपया लगातार अपनी जानकारी को बढ़ाते रहिए। ज्यादा से ज्यादा विश्वसनीय समाचार एवं सूचना माध्यमांे से जानकारी को चैक-क्राॅस चैक कीजिए और फिर मानवीय दृष्टिकोण से सोचिए। फिर समाज की बेहतरी के लिए अपने विचार दीजिए और समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दीजिए। -एपी भारती (पत्रकार) रुद्रपुर (उत्तराखंड) भारत व्हाट्सऐप 7895143358 -AP Bharti (Journalist) Rudrapur (Uttarakhand) India Whatsapp 7895143358 Please keep increasing your information. Check-cross-check the information through more and more reliable news and information channels and then think from a human point of view. Then give your views for the betterment of the society and give your contribution in making the society better. -AP Bharti (Journalist) Rudrapur (Uttarakhand) India Whatsapp 7895143358 पढ़िये हमारी हिंदी समाचार-विचार वेबसाइट्स Read our Hindi news-thinking websites https://bharatidunuiya.blogspot.com https://india2020newview.blogspot.com https://gangaprawah.blogspot.com https://www.pfhindi.com

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