मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में समाजवादी पार्टी ने भाजपा को लगातार दिए झटके
लखनऊ/वाराणसी। नरेंद्र मोदी अपनी लोकप्रियता के ढोल खुद पीटें या चमचों से पिटवाएं, उससे हकीकत नहीं बदलती। उनके संसदीय क्षेत्र के लोग भाजपा राज से बहुत त्रस्त हैं। बहुत ताकत लगाने और लोगों को काफी भरमाने के बावजूद भाजपा को कई चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। हालिया कोविड संकट ने क्षेत्र में सैकड़ों लोगों की जानें चली गईं। हालांकि श्मशानों से मिल रही खबरों के अनुसार तो हजारों लोग मारे गये। इस समय तो लोगों में मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री के खिलाफ लोगों में बहुत गुस्सा है। लेकिन लोगों में पहले से ही काफी नाराजी चली आ रही है।
बीते दिसंबर में भाजपा को समाजवादी पार्टी ने बनारस में शिक्षक और स्नातक विधान मंडल सदस्य चुनाव में करारी शिकस्त दी। इसके बाद फरवरी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (भाजपा का छात्र संगठन) का खाता भी नहीं खुला। यहां अध्यक्ष पद पर समाजवादी छात्रसभा का उम्मीदवार विजयी हुआ।
इसी तरह अप्रैल में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में हुए छात्रसंघ चुनाव में भी एबीवीपी अपना खाता तक नहीं खोल सकी और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएवयूआई ने सभी पदों पर जीत दर्ज की। हालिया पंचायत चुनाव में भी भाजपा कुछ बेहतर नहीं कर पाई और काफी जोर लगाने के बावजूद 40 जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों में उसके महज 7 प्रत्याशी ही जीत सके। इस स्थिति के चलते नेतृत्व में चिंता देखी जा रही है। क्षेत्र की बदहाली और कोविड संकट से भाजपा नेता जनता के सामने असहाय और निरुत्तर नजर आ रहे हैं।
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