कोरोना, लाॅकडाउन और सरकारी बदइंतजामी से बंपर बढ़ी गरीबी और बेरोजगारी, कुशल नेतृत्वकर्ता बताने वाले मुहं पर आंकड़ों का तमाचा

नई दिल्ली। कोरोना और सरकार की बदइंतजामियों के चलते के चलते साल 2020 में भारत में 7.5 करोड़ गरीब बढ़ गए हैं। अपने आपको कुशल नेतृत्वकर्ता प्रचारित करने पर अरबों रुपये फूंकने वाले नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार तथा भक्तों के मुहं पर यह तमाचा है कि दुनियाभर में कोरोना के चलते सबसे ज्यादा गरीब भारत में ही बढ़े हैं। पीइडब्ल्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना के चलते दुनियाभर में मध्यमवर्गीय लोगों की संख्या कम हुई है और गरीबों की संख्या बढ़ी है। इस रिपोर्ट में रोज 2 डॉलर यानि 150 रुपए कमाने वाले को गरीब और 750 से 1500 रुपए कमाने वाले को मध्यमवर्गीय की कैटेगरी में रखा गया था। अध्ययन के मुताबिक भारत में मध्यमवर्गीय लोगों की संख्या में 3.2 करोड़ की गिरावट भी हुई है। गरीब लोगों को, अमीरों के मुकाबले प्रदूषण का सामना भी ज्यादा करना पड़ता है। पिछले दिनों जाने-माने अमेरिकी अखबार दि न्यूयॉर्क टाइम्स ने दिल्ली के दो बच्चों की जिंदगी में एक दिन के वायु प्रदूषण का अध्ययन करके बताया था कि गरीब इलाके में रहने से 4 गुना ज्यादा वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। एक ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन के मुताबिक गरीबी लगातार तनाव की वजह भी बन सकती है। यह मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों के लिए खतरनाक हो सकती है। लंबे समय में इसके गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव हो सकते हैं। खासकर जब बचपन में ही दिमाग पर इसका प्रभाव हुआ हो। विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल सोशल मोबिलिटी रिपोर्ट 2020 के मुताबिक भारत के किसी गरीब परिवार को मिडिल क्लास में आने में 7 पीढ़ियों का समय लग जाता है। जिन देशों में लोग जितनी जल्दी खुद को गरीबी से निकालने में सक्षम हैं, वहां अमीर और गरीब के बीच का अंतर भी उतना ही कम है। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अर्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर जेफ्री सैश के अनुसार, गरीबी का मतलब रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी चीजों की कमी है। जैसे वह गरीब है जिसे खाना, पानी और आम चिकित्सा सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं। लेकिन इन पैमानों के साथ विश्व आर्थिक मंच जैसी संस्थाएं गरीबी मापने के लिए और जरूरी पैमानों पर भी ध्यान देती हैं। जैसे, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की उपलब्धता, टेक्नोलॉजी तक पहुंच, काम के अवसर, सैलरी और काम का ढंग, सामाजिक सुरक्षा आदि। सरकार का कर्तव्य होता है कि वह गरीब जनता के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे। भारत में नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के अंतर्गत लोगों को भोजन की गारंटी दी जाती है। इसी तरह पानी के लिए सरकार नल जल योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने की योजना चला रही है। जबकि आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की जाती है। इसके बावजूद भारत में सरकारी एजेंसी नीति आयोग द्वारा सरकार को कहा जाता है कि वह 67 फीसदी जनता को अनाज उपलब्ध कराने के बजाए 50 फीसदी जनता को ही अनाज दे। जाने-माने अर्थशास्त्रियों अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो की जोड़ी के मुताबिक गरीबी आपको एक मूर्खतापूर्ण दुष्चक्र में डाल देती है। गरीब कुछ पैसे बचाते हैं लेकिन कर्ज लेकर काम चलाते हैं। वे बचपन में जानलेवा बीमारियों के वैक्सीनेशन कराने कराने से छूट जाते हैं और बाद में जिंदगी भर दवाओं पर पैसे खर्च करते हैं। वे जिंदगी में कई सारे काम शुरू करते हैं लेकिन किसी में सफल नहीं होते। अर्थशास्त्री इसके लिए सरकारों की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हैं। और कहते हैं, गरीबों के लिए बनी सारी नीतियां इसलिए फेल हो जाती हैं क्योंकि सरकारों को गरीबी की समझ ही नहीं है! यही वजह है कि गरीब अपनी जिंदगी की कमाई का ज्यादातर हिस्सा खाने, ईंधन और बिजली पर खर्च कर देते हैं। भारत में तेजी से बढ़ी गरीबी के साथ गरीबी को लेकर विकासशील समाजों की सोच भी एक समस्या है। जिसके चलते लोगों को गरीबी से निकालने का गंभीर प्रयास नहीं किया जाता। दक्षिण अमेरिका के समाजविज्ञानी ऑस्कर गार्डियोला रिवेरा कहते हैं, लंबे समय से माना जाता रहा है कि अगर कुछ लोग गरीब नहीं होंगे तो मजदूरी, सफाई और छोटे-मोटे काम कौन करेगा। इसलिए इसे दुनिया का कामकाज चलाने के लिए एक जरूरी बुराई माना जाने लगा और इस तरह लोगों को इससे निकालने के लिए गंभीर प्रयास नहीं हुए। वैसे भी देखें तो अमीर लाग सरकार बनाते हैं और अमीरों की पिट्ठू यह सरकारें गरीबों के कल्याण के लिए नहीं बल्कि अमीरांे के फायदे के हिसाब से नीतियां और कार्यक्रम लागू करते हैं। सम्मानित साथियों सादर अभिवादन ! आइये कुछ सच जानें, सोचें-विचारें, खुद को और समाज को बेहतर करने लिए कुछ कोशिशें करें। गूगल में देखिए हमारे ब्लाॅग्स और अपनी बात कहिए: https://bharatiduniya.blogspot.com https://india2020newview.blogspot.com https://gangaprawah.blogspot.com अपने सुझाव, समाचार, रचनाएं ब्लाॅग्स हेतु भेजिए और पत्रकार बनने के लिए अपना बायोडाटा भेजिए ईमेल nirnaylok@gmail.com और indianewview@gmail.com पर। जय हिंद ! जय संविधान ! जय किसान ! जय जनता ! भारत की मेहनतकश जनता जिंदाबाद ! AP Bharati (Patrakar) Rudrapur Uttarakhand Whatsapp 7895143358

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