कोरोना संक्रमण बेकाबू, बेहिसाब हो रहीं मौतें और मोदी सरकार का चुनाव जीतने पर जोर
नई दिल्ली। 18 अप्रैल को करीब पौने तीन लाख कोरोना संक्रमितों का पता चला है। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है। न बेड मिल रहे, न दवा, न आॅक्सीजन। जनता बेहद डरी हुई है। रोजाना सैकड़ों मौतें हो रही हैं। लेकिन मोदी सरकार को जैसे इससे कोई लेना-देना नहीं है। मोदी, और शाह आदि चुनावी रैलियों और चुनाव जीतने की रणनीतियों में व्यस्त हैं। सरकारें लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने और मास्क पहनने की नसीहत दे रही हैं, जमकर लोगों के चालान काट मोटी वसूली की जा रही है। मोदी सरकार चुनाव प्रचार के तौर पर खुद ही इन नियमों की धज्जियां उड़ाती दिख रही हैं। अकेले पश्चिम बंगाल में अगले 7 दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6, गृह मंत्री अमित शाह की 8 और ममता बनर्जी की 17 रैलियां होनी हैं। करीब दो सप्ताह से भी ज्यादा समय से जनता और स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्थाएं बदहाल हैं लेकिन जिम्मेदार लोगों को चुनाव जीतने की चिंता ज्यादा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब से चुनाव प्रचार शुरू हुआ तब से अब तक 2600 प्रतिशत चुनावी राज्यों में कोरोना संक्रमण बढ़ा है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में बिगड़े हालात के लिए चुनावबाज नेता जिम्मेदार हैं। एक तो रैलियों/सभाओं में भारी भीड़ जमा की जा रही है दूसरे कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा चुनाव ड्यूटी में लगा हुआ है। 5 राज्यों में अब केवल पश्चिम बंगाल ही बचा है जहां तीन चरणों का चुनाव बाकी है। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैलियां कर रहीं हैं। इन रैलियों में लाखों की भीड़ आती है। 90 फीसदी लोग बगैर मास्क के होते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का तो होती ही नहीं। पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को 6,910 नए केस मिले हैं। यह राज्य में एक दिन में मिले मरीजों की सबसे बड़ी संख्या है। इसके बावजूद रैलियों के आयोजन में कोरोना गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल में अगले 8 दिनों के अंदर मोदी की 6, अमित शाह की 8 और ममता बनर्जी की 17 रैलियां होनी हैं। इसके अलावा अन्य नेताओं की सभा और बैठकों की कोई गिनती ही नहीं है। हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोरोना के चलते अपने पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। हालात पर नजर रखने वालों का कहना है कि 26 फरवरी को चुनाव तारीखों का ऐलान हुआ। उस दिन से लेकर अब तक कोरोना की रफ्तार 2663 प्रतिशत बढ़ गई है। ये ग्रोथ रेट 26 फरवरी से लेकर 4 मार्च यानी 7 दिनों में मिले कोरोना के कुल आंकड़े और इस हफ्ते यानी 10 से 16 अप्रैल के बीच मिले आंकड़ों के आधार पर निकाले गए हैं। 26 फरवरी से 4 मार्च के बीच 1205 मरीज मिले थे, जबकि अभी 10 से 16 अप्रैल के बीच 33,297 मरीजों की पहचान हुई।
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