निदा फाजली .. आवाजों के बाजारों में, खामोशी पहचाने कौन Nida Fazli Poem

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन आवाजों के बाजारों में खामोशी पहचाने कौन। सदियों-सदियों वही तमाशा रस्ता-रस्ता लम्बी खोज लेकिन जब हम मिल जाते हैं खो जाता है जाने कौन। जाने क्या-क्या बोल रहा था सरहद, प्यार, किताबें, खून कल मेरी नींदों में छुपकर जाग रहा था जाने कौन। मैं उसकी परछाई हूँ या वो मेरा आईना है मेरे ही घर में रहता है मेरे जैसा जाने कौन। किरन-किरन अलसाता सूरज पलक-पलक खुलती नींदें धीमे-धीमे बिखर रहा है जर्रा-जर्रा जाने कौन। सम्मानित साथियों सादर अभिवादन ! आइये कुछ सच जानें, सोचें-विचारें, खुद को और समाज को बेहतर करने लिए कुछ कोशिशें करें। गूगल में देखिए हमारे ब्लाॅग्स और अपनी बात कहिए: https://loknirnay11.blogspot.com https://bharatiduniya.blogspot.com https://india2020newview.blogspot.com https://gangaprawah.blogspot.com अपने सुझाव, समाचार, रचनाएं ब्लाॅग्स हेतु भेजिए और पत्रकार बनने के लिए अपना बायोडाटा भेजिए ईमेल nirnaylok@gmail.com और indianewview@gmail.com पर। जय हिंद ! जय संविधान ! जय किसान ! जय जनता ! भारत की मेहनतकश जनता जिंदाबाद !

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