निदा फाजली .. आवाजों के बाजारों में, खामोशी पहचाने कौन Nida Fazli Poem
मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में
खामोशी पहचाने कौन।
सदियों-सदियों वही तमाशा
रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं
खो जाता है जाने कौन।
जाने क्या-क्या बोल रहा था
सरहद, प्यार, किताबें, खून
कल मेरी नींदों में छुपकर
जाग रहा था जाने कौन।
मैं उसकी परछाई हूँ या
वो मेरा आईना है
मेरे ही घर में रहता है
मेरे जैसा जाने कौन।
किरन-किरन अलसाता सूरज
पलक-पलक खुलती नींदें
धीमे-धीमे बिखर रहा है
जर्रा-जर्रा जाने कौन।
सम्मानित साथियों सादर अभिवादन !
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