किसानों के खिलाफ किसी बड़ी साजिश की तैयारी में है सरकार ? टिकैत बोले, किसान सरकार से हारे तो जिंदगी हार जाएंगे करोड़ों लोग भुखमरी की हालत में चले जाएंगे

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) उत्तराखण्ड। केंद्र सरकार द्वारा लागू जनविरोधी 3 कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के तहत उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में 1 मार्च को किसान महापंचायत में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान किसान नेता डाक्टर दर्शन पाल, गुरनम सिंह चढूनी, राकेश टिकैत, आशीष मित्तल, सुश्री कविता, अधिवक्ता भानु प्रताप सहित तमाम नेताओं ने आवाज बुलंद की। क्या केंद्र सरकार आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ कोई बड़ा अभियान लेने वाली है ? जिस तरह से पिछले तीन महीने से अधिक समय से सरकार ने किसानों को हर तरह से परेशान और बदनाम करने का काम किया है उससे आंदोलनकारी किसानों की केंद्र सरकार को लेकर शंका स्वाभाविक है। यहां भारी जनसैलाब के बीच भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने आशंका जताई है कि किसान आंदोलन के खिलाफ केंद्र सरकार कुछ तो खिचड़ी पका रही है। उन्होंने कहा, सरकार की खामोशी इशारा कर रही है कि आंदोलन के खिलाफ कुछ तो होने वाला है। 15-20 दिनों से सरकार खामोश है। वह किसी न किसी तैयारी में लगी है टिकैत ने कहा कि हम तब तक दिल्ली से वापस नहीं जाएंगे, जब तक कानून को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती। अब केंद्र सरकार को फैसला करना है कि आंदोलन कब खत्म होगा। सरकार सभी मांगे मान ले तो हम भी अपने गांव चले जाएंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर किसान खेत भी देखेंगे और आंदोलन भी। टिकैत ने कहा कि किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 12 दौर की बैठकें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कहा है कि बातचीत के जरिये किसानों की समस्या का समाधान होगा। लेकिन बैठक को लेकर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का प्रस्ताव किसानों को नहीं मिला है। सरकार जब बुलाए हम बातचीत को तैयार हैं।
फसलें नष्ट करने पर टिकैत ने कहा कि हम तो बता रहे हैं कि अभी ऐसा समय नहीं आया है। लेकिन सरकार को भी किसानों से अपील करनी चाहिए कि वे फसल नष्ट न करें। टिकैत ने बताया कि हम 24 मार्च तक देशभर में कई महापंचायत करेंगे। 1980 और 1990 के दशक के प्रमुख किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत ने कहा कि किसान को अपनी जमीन औलाद से भी अधिक प्यारी होती है। किसान जब जीवित रहते अपनी जमीन औलाद के नाम नहीं कर सकता है तो फिर वह अपनी जमीन को जानबूझकर किसी अंजान को कैसे सौंप देगा? किसान अपनी एक इंच जमीन भी कारपोरेट घरानों को नहीं देने वाले हैं। सोमवार को किसान मैदान में कृषि कानूनों के खिलाफ आयोजित किसान महापंचायत में करीब 50 हजार से अधिक किसान और अन्य लोग पहुंचे। हालांकि एक अनुमान है कि एक लाख से भी अधिक लोग इस कार्यक्रम में पहुंचे। लेकिन मुख्यधारा के मीडिया के बड़े हिस्से द्वारा संख्या को बहुत कम बताया जा रहा है। टिकैत ने कहा कि किसानों की जमीन को उससे कोई छीन नहीं सकता है। सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानों पर मुकदमे दर्ज कर और नोटिसों का डर दिखा रही है, लेकिन किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। जो किसान नोटिस से डरता है, उसे आंदोलन में आने की जरूरत नहीं है। यदि उत्तराखंड सरकार ने किसानों की जमीन की तरफ आंख उठाकर देखी तो दिल्ली जैसा हाल कर देंगे। केंद्र सरकार पिछले करीब 15 दिनों से किसान आंदोलन को लेकर चुप है, लगता है वह किसान आंदोलन के दमन के लिए कोई योजना तैयार कर रही है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आजादी के समय देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 60 प्रतिशत था, जो अब घटकर 10 प्रतिशत पहुंच गया है। अब सरकार की योजना इसे छह प्रतिशत तक पहुंचाने की है। यह लड़ाई अस्तित्व और खेती को बचाने की है। सरकार किसानों को खेतिहर मजदूर बनाने की तैयारी में है, जिस कारण किसानों को मजबूरी में खेती छोड़नी पड़ेगी। इससे देश में भुखमरी बढ़ेगी। कहा कि यदि लड़ाई हारे तो जिंदगी हार जाएंगे इसलिए इस लड़ाई को जीतने तक लड़ेंगे। किसान नेता डाक्टर आशीष मित्तल ने कहा कि कोरोना के विकट दौर में 5 जून 2020 को किसान बिल का बम गिराया जो 21 सितंबर को संसद में पारित होने के साथ फट गया। यह देश के किसानों पर बड़ा हमला है। उन्होंने कहा कि किसान देश की जनता को आजाद कराने की यह विशेष लड़ाई है। कहा कि मेहनत के श्रम की लूट कराने वाले मेहनत कराने वालों को परजीवी बात रहे हैं।
किसान नेताओं ने मोदी सरक की तानाशाही और दमनकारी नीतियों पर प्रहार किया। वक्ताओं ने मोदी को जनता को जाती-धर्म के नाम पर बांटकर, दंगों में झोंककर अदानियों-अंबनियों का सेवक बताया। लोगों ने ठग्गू का लड्डू बताते हुए कहा कि ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे उसने ठगा नहीं। महापंचयत में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में इन्टरार्क व जेबीएम के मजदूर अपनी शिफ्टों के साथ पहुँचे, जबकि माइक्रोमैक्स, महिंद्रा, एलजीबी, नेस्ले, यजाकी, गुजरात अंबुजा, कारोलिया, टाटा मोटर्स आदि सहित तमाम कंपनियों के मजदूर शामिल रहे। मासा, इन्कलाबी मजदूर केंद्र, मजदूर सहयोग केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, पछास, क्रालोस, ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर सहित तमाम जन संगठनों ने भी भागीदारी की। मालूम हो कि मोदी सरकार अपनी चिरपरिचित सजिशपूर्ण व दमनकारी घृणित हरकतों के साथ सक्रिय है। जबकि संघर्षरत किसान पूरी बहादुरी से इनका डटकर मुकाबला कर रहे हैं। सरकार प्रायोजित हिंसा, दमन व मीडिया के दुष्प्रचारों को झेलकर भी वे अपने आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने के प्रति संकल्पबद्ध हैं। किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि किसान संयुक्त मोर्चा ने पूरे देश में किसानों और आम जनता को जागरूक करने का काम किया है। जब तक सरकार तीनों काले कानून वापस नहीं लेगी, आंदोलन जारी रहेगा। तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर किसानों को बारी-बारी लूटा है। एक ने किसानों को आईसीयू में तो दूसरे ने वेंटिलेटर पर पहुंचाया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकियू जिलाध्यक्ष करम सिंह पड्डा ने की। जय हिंद ! जय संविधान ! जय किसान ! जय जनता ! भारत की मेहनतकश जनता जिंदाबाद ! गूगल में देखिए हमारे ब्लाॅग्स और अपनी बात कहिए: https://loknirnay11.blogspot.com https://bharatiduniya.blogspot.com https://india2020newview.blogspot.com https://gangaprawah.blogspot.com अपने सुझाव, समाचार, रचनाएं ब्लाॅग्स हेतु भेजिए और पत्रकार बनने के लिए अपना बायोडाटा भेजिए ईमेल nirnaylok@gmail.com और indianewview@gmail.com पर।

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