मोदी सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ किसानों ने की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से शिकायत !

नई दिल्ली। कृषि और किसान विरोधी केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को पूरी तरह निरस्त करने की मांग पर अडिग किसान संगठनों के कानूनी प्रकोष्ठ ने दिल्ली से सटे बॉर्डर पर धरनास्थल पर इंटरनेट सेवा बंद किए जाने और किसानों की अवैध गिरफ्तारी को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) को पत्र लिखा है। सिंघु, गाजीपुर और टीकरी बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। किसान संगठनों के कानूनी प्रकोष्ठ ने अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के इंडिया हेड को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कई मांगें रखी हैं। इनमें पूछताछ करने वाले अधिकारियों की शिनाख्त, गिरफ्तारियों के मेमो, गिरफ्तार लोगों के परिजनों को सूचना देना, डायरी एंट्री और मेडिकल चेक-अप शामिल हैं। वकीलों का कहना है कि सरकार मनमाने ढंग से काम करके मानवाधिकारों का हनन कर रही है। प्रकोष्ठ ने दावा किया कि जब से किसानों का विरोध शुरू हुआ है, तब से पुलिस उन्हें बिना किसी कारणवश अनुचित तरीके से गिरफ्तार कर रही है। इस बाबत वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने या पूछताछ के दौरान पुलिस के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे। जय हिंद ! जय संविधान ! जय किसान ! जय जनता ! भारत की मेहनतकश जनता जिंदाबाद ! गूगल में देखिए हमारे ब्लाॅग्स और अपनी बात कहिए: https://india2020newview.blogspot.com https://gangaprawah.blogspot.com अपने सुझाव, समाचार, रचनाएं ब्लाॅग्स हेतु भेजिए और पत्रकार बनने के लिए अपना बायोडाटा भेजिए ईमेल nirnaylok@gmail.com और indianewview@gmail.com पर।

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