मुकेश अंबानी-किशोर बियानी को झटका - दिल्ली हाईकोर्ट से अमेजन को मिली राहत
नयी दिल्ली। फ्यूचर रिटेल और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच जो डील होनी थी, उस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। पिछले साल अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने फ्यूचर रिटेल को खरीदने के लिए 24,713 करोड़ रुपए की डील की थी। इस सौदे पर जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन ने आपत्ति जताई थी। हाईकोर्ट ने इस सौदे पर क्या कहा है? इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है? और रिलायंस-फ्यूचर की डील से अमेजन को आपत्ति क्या है? आइए जानते हैं
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस जेआर मिधा ने मंगलवार को कहा कि कोर्ट को अमेजन के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल अंतरिम आदेश जारी करने की जरूरत है। उन्होंने फ्यूचर ग्रुप को इस सौदे को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यानी, कोर्ट के फैसले तक फ्यूचर ग्रुप इस डील को लेकर कुछ नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट का ये आदेश अमेजन की याचिका पर आया है।
बीते साल अगस्त में रिलायंस और फ्यूचर रिटेल के बीच सौदा हुआ। इस सौदे के खिलाफ अमेजन सिंगापुर की आर्बिट्रेशन कोर्ट पहुंची। 25 अक्टूबर 2020 को सिंगापुर की कोर्ट ने रिलायंस और फ्यूचर डील पर रोक लगा दी थी। सिंगापुर कोर्ट ने अक्टूबर में डील पर रोक लगाते हुए कहा था कि वो 90 दिन में कोई फैसला देगी। चूंकि ये रोक सिंगापुर की कोर्ट ने लगाई थी, इसलिए रिलायंस और फ्यूचर इस आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं थे। यही वजह थी कि सिंगापुर की कोर्ट का आदेश लागू करवाने के लिए अमेजन को दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करनी पड़ी।
अगस्त 2019 में अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप को 1,431 करोड़ रुपए चुकाए थे। फ्यूचर कूपन्स के पास फ्यूचर रिटेल में करीब 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। यानी एक तरह से अमेजन ने फ्यूचर रिटेल में पैसा लगाने की शुरुआत कर दी थी। अमेजन और फ्यूचर कूपन्स के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें तय हुआ कि अमेजन 3 से 10 साल बाद फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी खरीदने की हकदार होगी। साथ ही ये भी तय हुआ कि फ्यूचर रिटेल अपनी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज को नहीं बेचेगी। लेकिन लॉकडाउन में फ्यूचर रिटेल की हालत खराब हो गई। किशोर बियानी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि लॉकडाउन के बाद सारे स्टोर बंद हो गए और अगले तीन-चार महीनों में ही कंपनी को 7,000 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। आखिरकार इस कंपनी को बेचने का फैसला लिया गया।
अगस्त 2020 में रिलायंस ने 24,713 करोड़ रुपए में फ्यूचर रिटेल खरीदने की घोषणा कर दी। इस डील पर बात कुछ आगे बढ़ती, उससे पहले ही अमेजन ने डील रोकने के लिए सिंगापुर की कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सिंगापुर की कोर्ट ने डील पर रोक लगा दी। अमेजन का कहना था कि फ्यूचर रिटेल ने उससे बिना पूछे रिलायंस के साथ डील की, जो समझौते का उल्लंघन है।
ज्ञातव्य है कि अमेजन अभी पूरी तरह से ऑनलाइन कारोबार के भरोसे ही है और उसे ऑफलाइन रिटेल तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए फ्यूचर रिटेल के बिग बाजार जैसे ब्रांड और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। दूसरी ओर रिलायंस अब खुद को ई-कॉमर्स के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। रिलायंस के पास पहले से ही 12 हजार स्टोर्स हैं। इनका सालाना रेवेन्यू 1.62 लाख करोड़ रुपए है। रिलायंस भारत का सबसे बड़ा रिटेल मार्केट बनने के चक्कर मंे है। अगर फ्यूचर/बिग बाजार वाली डील फाइनल हो जाती है तो उसे फ्यूचर रिटेल के 420 शहरों में बने 1,800 से ज्यादा स्टोर्स और मिल जाते। फ्यूचर रिटेल का सालाना रेवेन्यू 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
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