संदीप बामजई की किताब में बताया, रियासतों के शहजादे प्रिंसिस्तान चाहते थे, भारत पाकिस्तान की राजनीति से अलग थे, नेहरू, पटेल, मेनन जैसे-कैसे प्लान फेल किया
नई दिल्ली। भारत की आजादी के बाद भारत बनने की कहानी पर लिखी गई कई पुस्तकों में अब संदीप बामजई की पुस्तक प्रिंसिस्तान भी शामिल हो गई है। किताब में बताया गया है कि कैसे 565 रियासतों जिन्हें प्रिंसिस्तान का नाम दिया गया, को दो स्वतंत्र राज्यों भारत और पाकिस्तान के दायरे से बाहर रखने की साजिश को जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और लॉर्ड माउंटबेटन ने नाकाम किया।
लेखक के अनुसार शहजादे कभी भी स्वतंत्रता नहीं चाहते थे। शहजादों का एक चैंबर था और चैंबर ऑफ प्रिसेंस के चांसलर भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान थे। शहजादों ने काफी हद तक खुद को हिंदुस्तान और पाकिस्तान के झमेले से लंबे समय तक बाहर रहने में कामयाबी भी हासिल कर ली थी। परन्तु पंडित नेहरू, सरदार पटेल और लॉर्ड माउंटबेंटन ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। भारत को अस्थिर और कमजोर करने के मिशन में इन रियासतों का साथ मोहम्मद अली जिन्ना, लॉर्ड वेवेल और ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने भरपूर साथ दिया।
किताब के अनुसार, नेहरू के सम्राज्यवाद विरोधी स्वभाव, पटेल की चतुराई के और गांधीजी एक आकार रहित भारत का विश्वास जिसमें वह चाहते थे कि लोग सह-अस्तित्व में रहें। भारत को एक करने का अभूतपूर्व कार्य जिसमें हर नीति का प्रयोग किया गया यह इस पुस्तक में दर्ज है जिसे पढ़ते हुए आपको अच्छा लगता है। बकौल किताब रियासतों के एकीकरण में एक और व्यक्ति वीपी मेनन जो ऐसे नौकरशाह थे, जिन्होंने पहले माउंटबेटन के साथ काम किया था और जिन्होंने भारत की अंतहीन यात्रा की, उनका भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किताब में बताया गया है कि मेनन ने इन रियासतदारों को साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाकर अपनी ओर मिलाया।
The Congress' reasons for rejecting the offer had at their head the continued use of Princistan and the Princes to block the path to freedom Jawahar lal Nehru VK krishna menon sardar patel congress mohd. ali jinnah
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