कर्मचारियों को उल्लू बना रही मोदी सरकार, कैश की जगह दे रही जीएसटी कमाई वाले कूपन



 नई दिल्ली। जनता को लागातार बेरोजगार और तबाह कर रही मोदी सरकार जनता का हितैषी होने का ढिंढोरा खूब पीटती है। कर्मचारियों के वेतन और भत्ते देने मंे अक्षम सरकार अधिकारियों व कर्मचारियों को गिफ्ट देने का नाटक कर रही है। सरकार के प्रचार तंत्र द्वारा कहा जा रहा है कि इस काम से केंद्रीय कार्मिकों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है.

मोदी सरकार ने 10,000 रुपये का स्पेशल फेस्टिवल एडवांस कार्मिकों को देने की घोषणा की है, कहा जा रहा है कि इस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा. कार्मिक इसकी वापसी 10 आसान किस्तों में कर सकेंगे. अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में कैश वाउचर मिलेंगे. सरकार का यह भी कहना है कि इस योजना का इसका उद्देश्य त्योहारी मौसम में उपभोक्ता मांग में सुधार और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देना है.

एलटीसी के एवज में जो नकद वाउचर मिलेंगे, उससे कर्मचारी ऐसे सामान खरीद सकेंगे, जिन पर 12 प्रतिशत या उससे अधिक का जीएसटी लगता है, मगर इसमें खाने-पीने का कोई सामान शामिल नहीं होगा. केंद्रीय कर्मचारी के अलावा पब्लिक सेक्टर व बैंक कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलेगी. केंद्र सरकार ने राज्यों से भी इस योजना को अपनाने का सुझाव दिया. इसके अलावा पिछले दिनों वित्त मंत्री ने राज्यों को 50 साल के लिए 12,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज देने की भी घोषणा की.

केंद्रीय कर्मियों को एलटीसी की जगह मिलने वाले आयकर-मुक्त कैश वाउचर से 12 प्रतिशत तक या इससे अधिक जीएसटी रेट वाले सामान खरीदना अनिवार्य होगा। खाने-पीने के सामान खरीदने में इस वाउचर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इस वाउचर से कर्मचारियों को डिजिटल खरीदारी करनी होगी। कर्मचारियों को टिकट फेयर का तीन गुना व लीव एनकैशमेंट के एक गुना के बराबर सामान खरीदने पड़ेंगे। 

यह वाउचर अगले साल, 31 मार्च तक खर्च करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस काम में सरकार 5,675 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। मालूम हो कि प्रत्येक चार साल में सरकार अपने कर्मचारियों को उनकी पसंद के किसी गंतव्य की यात्रा के लिए एलटीसी देती है. एक एलटीसी उन्हें उनके गृह राज्य की यात्रा के लिए मिलता है।

मोदी सरकार जनता को और जिनके दम पर वह चल रही है, अपने कार्मिकों को भी बेवकूफ बनाने से नहीं चूक रही। नकद की जगह कूपन या वाउचर देकर वह शर्त भी लगा रही है कि इससे वे खाने-पीने की चीजें नहीं खरीद सकते और वही सामान खरीदेंगे जिन पर कम से कम 12 प्रतिशत जीएसटी लागू हो। यानी सरकार खुद को उदार या दरियादिल दिखाते हुए एक ओर कार्मिकों को खुश करने का प्रयास कर रही है वहीं उनसे जीएसटी वसूलकर अपनी आमदनी करना चाहती है। यह अलग बात है कि कार्मिक कितना खुश होते हैं और सरकारी वाउचर से वे कितना लाभान्वित होते हैं।

LTC Central Employee


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