शैतान तानाशाह फर्जी आंसू बहाता, जनता से झूठा प्रेम दिखाता, सेना से निकटता प्रदर्शित करता है



प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने सोमवार को भावुक होते हुए कथित रूप से आंसू बहाए। सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की 75वीं सालगिरह पर उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सैनिकों का शुक्रिया अदा किया। साथ ही अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी। फिर नम आंखों को पोंछते नजर आए। इस दौरान सैनिकों के बलिदान का भी जिक्र किया। दावा किया कि उत्तर कोरिया में कोरोना का कोई केस नहीं है।

बताया जाता है कि वर्कर्स पार्टी के 75वें स्थापना दिवस के लिए कई दिनों से तैयारियां की जा रहीं थीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों लोग राजधानी प्योंगयांग पहुंचे। सबसे पहले मिलिट्री परेड हुई। इसमें नॉर्थ कोरिया की सैन्य ताकत को दिखाया गया। मिसाइलें भी नजर आईं। किम जोंग उन ने सलामी ली और भाषण दिया। यहां स्कूली बच्चे भी मौजूद थे। देश को और सेना को संबोधित करते हुए किम ने कहा- मैं अपने सैनिकों के बलिदान और उनके साहस के लिए शुक्रगुजार हूं। हमने कई मुश्किल चुनौतियों का सामना किया है। हाल ही में देश ने तूफान और कोरोनावायरस का सामना किया है। इस दौरान सैनिकों ने फिर साबित किया कि वे कितने मुश्किल हालात में काम करते हैं। उन्होंने देश को तूफानों से बचाया और वायरस से भी। अगर मैं देश के लोगों के विकास में कहीं नाकाम रहा तो इसके लिए माफी मांगता हूं। इस दौरान किम चश्मा उतारकर आंसू पोंछते नजर आए।

किम जोंग उन ने कहा- मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे देश में कोरोनावायरस का एक भी केस नहीं है। किम बोले, हो सकता है कि मेरी कोशिशें और लगन पर्याप्त नहीं रहे हों। लेकिन, मैं ये भी जानता हूं कि मेरे देश के लोग मुझ पर कितना भरोसा करते हैं।

मालूम हो कि उत्तर कोरिया देश में कोरोना प्रभाव से अछूता रहने के दावे करता रहा है लेकिन साउथ कोरिया और अमेरिका किम जोंग के इस दावे पर सवालिया निशान लगाते आए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया के 40 फीसदी लोग खाने की कमी से जूझ रहे हैं। हाल ही में आए तूफानों और कोरोना ने यहां की अर्थव्यवस्था को बेहद कमजोर कर दिया है।

किम की बातें / व्यवहार जनविरोधी तानाशाहों की बातों और व्यवहार से मिलता-जुलता है। हमारे भारत का शासक भी ऐसा ही ढोंगी है। वह सेना से निकटता जताता रहा है, जनता से फर्जी प्रेम प्रदर्शित कर उसे लगातार मुश्किलों में डालता रहा है, यह भी प्रचार करवाता रहा है कि देश और दुनिया भर में उसके काम को अच्छा बताया जा रहा है। उत्तर कोरिया की जनता की हालत बेहद खराब बताई जाती रही है। देश में ऐसी बंदिश है कि समाचार माध्यम रिपोर्टिंग करने को स्वतंत्र नहीं हैं। किम जोंग उन बेहद बेदर्द, क्रूर शासक के रूप में कुख्यता हैं।

तानाशाह शायद ऐसे ही होते हैं, वे जनता का जमकर शोषण करते हैं या होने देते हैं, बस, जीने भर को भोजन और जरूरी चीजें उपलब्ध रहने देते हैं, फौज, न्यायपालिका और दूसरे सरकारी उपकरणों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं, मीडिया को गुलाम बना लेते हैं, धन्नासेठों को चाहे-अनचाहे तानाशाहों का समर्थन करना पड़ता है। किसी को देश का दुश्मन घोषित करके देश के या धर्म के नाम पर समर्थकों के बड़े समूह का निर्माण कर लिया जाता है जो पागलपन की हद तक तानाशाह के हर जनविरोधी कदम को जनहित और देशहित में सही साबित करने को हर समय लड़ने-मारने को तत्पर रहते हैं। तानाशाह की असल मंशा और तथ्य और सत्य से उन्मादी भक्तों कोई मतलब नहीं होता। दुर्भाग्य से हमारे देश भारत में ऐसा ही है।

kim jong un Pyongyang North Korea

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